ब्रज की होली पर देवकीनंदन ठाकुर का संदेश: “यह प्रेम और भक्ति का पर्व, नशे और दुर्व्यवहार की नहीं”

ब्रज की होली पर देवकीनंदन ठाकुर का संदेश: “यह प्रेम और भक्ति का पर्व, नशे और दुर्व्यवहार की नहीं”

मथुरा : ब्रज क्षेत्र में होली का उत्सव अपने आध्यात्मिक और सांस्कृतिक स्वरूप के लिए देश-विदेश में प्रसिद्ध है। इसी क्रम में कथावाचक और आध्यात्मिक प्रवक्ता देवकीनंदन ठाकुर ने मथुरा में होली को लेकर विशेष संदेश जारी किया है। उन्होंने कहा कि ब्रज की होली भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं से जुड़ा पावन उत्सव है और इसे मर्यादा व संस्कारों के साथ मनाया जाना चाहिए।

 

 

“ब्रज की होली में प्रेम का रंग होना चाहिए”

देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि ब्रज में आने वाले श्रद्धालु भगवान के रंग में रंगने के लिए आते हैं। यहां की होली केवल रंग खेलने तक सीमित नहीं, बल्कि यह भक्ति, प्रेम और परंपरा का उत्सव है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि शराब, मांस, जुआ या किसी भी प्रकार का नशा इस पवित्र पर्व की भावना के विपरीत है।

उन्होंने लोगों से अपील की कि त्योहार को सकारात्मक वातावरण में मनाया जाए और सनातन परंपराओं का सम्मान किया जाए।

चंद्र ग्रहण के कारण विशेष सावधानी

इस वर्ष होली पूर्णिमा के दिन चंद्र ग्रहण पड़ने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूतक काल में विशेष सावधानी रखनी चाहिए। गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों को इस दौरान घर में रहकर भगवान का स्मरण करने की सलाह दी गई है।

नशे के खिलाफ सख्त रुख

देवकीनंदन ठाकुर पहले भी अपने प्रवचनों में नशे के दुष्प्रभावों पर चिंता जता चुके हैं। उन्होंने युवाओं से अपील की कि शराब और नशीले पदार्थों से दूर रहें, क्योंकि यह व्यक्ति और समाज दोनों के लिए हानिकारक है।

ब्रज में कहां-कहां होती है होली की धूम?

मथुरा

वृंदावन

बरसाना

नंदगांव

गोकुल

महावन

बलदेव

ब्रज की प्रमुख होली परंपराएं

फूलों की होली

वृंदावन के मंदिरों में भक्तों पर फूल बरसाए जाते हैं। यह दृश्य भक्ति और सौंदर्य का अद्भुत संगम होता है।

ठमार होली

बरसाना और नंदगांव में हंसी-मजाक के बीच महिलाएं लाठियों से पुरुषों पर प्रहार करती हैं और पुरुष ढाल से बचाव करते हैं।

 होलिका दहन और धुलेंडी

पूर्णिमा की रात होलिका दहन होता है। इसके अगले दिन रंगों की होली, जिसे धुलेंडी कहा जाता है, मनाई जाती है।

40 दिन चलता है ब्रज का उत्सव

ब्रज क्षेत्र में होली बसंत पंचमी से शुरू होकर लगभग 40 दिनों तक चलती है। यहां का उत्सव केवल एक दिन का नहीं, बल्कि संपूर्ण सांस्कृतिक परंपरा का जीवंत प्रदर्शन है।